Sunday, July 19, 2009

आँखों में क्या जी?

मम्मी के साथ कुछ दिन पहले लखनऊ गया था.. होटल के कमरे में एक अलमारी रखी थी.. बिल्कुल मेरे साईज की.. छुपम छुपाई खेलने के लिये एकदम उपयुक्त.. तो फिर मौका भी था और साधन भी.. खेल शुरु..
इन चित्रों में मेरी आँखे और चहरे के भाव पढियें..








कैसा लगा?


23 comments:

अजय कुमार झा July 19, 2009 8:23 AM  

पढ़ लिए बिटवा..हमको लगता है ..तुम्हरी शैतानी देख के ..तुम बड़े होकर ओफ्फिस की अलमारी में भी ऐसे ही छुपंछुपायी खेलोगे...बस आलमारी का साईज बड़ा होगा..और सब कुछ वैसा ही रहेगा..आँखों का भाव भी...स्नेहाशीष.

Ratan Singh Shekhawat July 19, 2009 8:56 AM  

आँखों में छुपा छुपी खेलने की मस्ती दिखाई दे रही है

रचना July 19, 2009 9:19 AM  

ranjan
you need to be caeful when you let your child play such games . because you shoot pics the child is likely to belive that he can do this again also
since i love adi its important to communicate this to you that if this act the child repeats inabsence of a adult it will harm the child

one moment of carlessless will cost us all

raj July 19, 2009 10:14 AM  

aaditya luks very sweet..par rachna jee ne bilkul theel kaha hai....tc care...

जितेन्द़ भगत July 19, 2009 11:44 AM  

ओय,कहॉं छुप गया आदि‍।
पापा की फाइल कहॉं नि‍काल फेंकी यार।

dhiru singh {धीरू सिंह} July 19, 2009 11:45 AM  

सुनहरा भविष्य

mehek July 19, 2009 12:02 PM  

aadi bahut achhe lag rahe ho,hame laga naa jaane ankhon ankhon mein kahi isharo wali baat tho nahi:):),

vaise hum rachana ji se 100 percent sehmat hai ranjan ji,kabhi galti se agar darwaza band ho jaye,please aisa kabhi na ho.

रंजना [रंजू भाटिया] July 19, 2009 12:12 PM  

आँखों में शरारत ,होंठों पर मुस्कान है ..आदि की यह लुकाछिपी डर से अनजान है ..बचपन होता है कितना भोला भाला ....यही तो इसकी पहचान है :)

‘नज़र’ July 19, 2009 12:13 PM  

वाह आदि तेरी मौज-मस्ती... लगे रहो छोटे मियाँ!
----
पढ़िए: सबसे दूर स्थित सुपरनोवा खोजा गया

सैयद | Syed July 19, 2009 12:30 PM  

तो लखनऊ में खूब मज़े किये आपने ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक July 19, 2009 1:30 PM  

बढ़िया, लगे रहो आदि।

ताऊ रामपुरिया July 19, 2009 2:35 PM  

मजे लेते रहो प्यारे..पर यार तेरे अंदर एक बात खराब है..तू अकेले अकेले मजे लेता है और फ़िर हमे सुनाकर लजाता है..ठिक है बेटा आज हम भी चाकलेट खायेंगे और तेरे को नही देंगे.:) अब आयेगा ना मजा.

रामराम.

sanjay vyas July 19, 2009 2:58 PM  

मोहक चित्रावली.लखनऊ की भूलभलैया में छुप्पम छुपाई मत खेलना.वहां बड़े बड़े भी गुम जाते है.
मस्ती करते रहो.

प्रेमलता पांडे July 19, 2009 3:44 PM  

आँखों में क्या जी?
गज़ब का दंगल!!!

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey July 19, 2009 6:30 PM  

यह खेलना तो अच्छा है, पर अकेले अकेले यह मत खेलना।

जादू.... jaadoo July 19, 2009 8:24 PM  

अरे वाह । भैया आप तो बड़े मस्‍तीबाज़ हो ।
मैं छोटा हूं ना ।
इतनी मस्‍ती नहीं करता मैं अभी ।

संगीता पुरी July 19, 2009 8:40 PM  

आंखों मे .. मस्‍ती ही मस्‍ती.. और क्‍या ?

Pakhi July 19, 2009 9:13 PM  

Looking smart Aditya.
Wishing u happy icecream day...aj dher sari icecream khayi ki nahin.
See my new Post on "Icecrem Day" at "Pakhi ki duniya" .

Jayant chaddha July 20, 2009 9:38 AM  

छुप्पा-छुप्पी बहोत हुई.... अब सामने आ जाओ ना......
मस्त रहो... आबाद रहो.....
www.nayikalm.blogspot.com

Science Bloggers Association July 20, 2009 1:45 PM  

Sirf shararat, aur kuchh nahee.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Udan Tashtari July 20, 2009 5:13 PM  

इत्ती बदमाशी छूट रही है आदि...बहुत प्यारे लग रहे हो..लेकिन अकेले में मत बैठ जाना अल्मारी बंद करके. मम्मी को बता कर ही खेलना!

PD July 22, 2009 9:55 PM  

पता है आदि बेटा? बच्चों को मैं खूब प्यार करता हूं, मगर सभी बच्चे मुझसे डरते भी बहुत हैं.. उनके पापा मम्मी मुझसे डरा देते हैं.. अभी दीदी कि बिटिया से बात की तो बोल रही थी कि आप डांटोगे तो नहीं ना? :(

आदि July 22, 2009 10:39 PM  

प्रशांत अंकल,

आप तो चिन्ता नहीं करो.. मेरे पास दिल्ली आ जाओ मैं आपसे बिल्कुल नहीं डरुंगा बल्कि खों खों कर डरा दूंगा.. आप डरना नहीं..

कब आ रहे हो?

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मैं आदित्य

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मेरे बारे में

मै आदि हूँ.. मेरा पुरा नाम है.. "आदित्य रंजन".. २ मई २००८ को जोधपुर के "कमला नगर अस्पताल" मे दिन के ३बजकर १४ मिनिट पर मेरा जन्म हुआ.. और मेरे बारे में क्या बताऊ.. ये पूरा ब्लोग ही मेरे बारें में है.. हर रोज नई बात पता चलेगी.. ये सभी बाते आप तक मेरे मम्मी-पापा (अंजु - रंजन) पहुँचा रहे हैं..

आप आये आपका शुक्रिया!!

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