Wednesday, July 15, 2009

कानिया मानिया कुर्र.....

पता है दादी दिल्ली आई थी.. हाँ पिछले बुधवार (८ जुलाई)  को पापा बहुत दिनों बाद दिल्ली आये और उसी दिन मम्मी को भी बाहर जाना था.. पापा बड़ी असमंझस कि स्थिति में थे.. कुछ नहीं सुझा तो तुरंत दादी को फोन लगाया और  और दादी शाम की ट्रेन में बैठ गुरुवार कि सुबह दिल्ली आ गई.. है न मेरी दादी प्यारी..
धीरे धीरे दादी से दोस्ती भी हो गई और कल शाम दादी के वापस जाने से पहले उनके साथ खुब मस्ती की..

दादी के साथ कानिया मानिया कुर्र वाला खेल खेला...दादी मेरे कान के पास आकर जोर से कुर्रर किया और मैने इस गुदगिदी का खुब मजा लिया.. और तुरंत दुसरा कान आगे कर दिया..






बडा़ मजा आया दादी के साथ खेल कर.. इसके बाद एक और खेल भी खेला.. वो बताऊगां कल..

मजा आया.. गुदगुदी हुई!!

23 comments:

seema gupta July 15, 2009 10:55 AM  

ओये हीरो..............दादी के साथ सच मे बहुत मजा आया.....काश हम भी आदि की उम्र के हो जाएँ है न....

love ya

संगीता पुरी July 15, 2009 11:14 AM  

हमें ललचा ललचाकर खुद इतने मजे करते हो !!

mehek July 15, 2009 11:16 AM  

aare waah aadi aur dadi dono milke khub maze kar rahe hai,bahut khub,vaise dadi ji ki aachanl chav mein aap lag bahut pyare rahe ho.aapki dadi ji ko hamara pranam kahe.

HEY PRABHU YEH TERA PATH July 15, 2009 12:15 PM  

खुब मस्ती करते रहो मेरे दोस्त

आभार/शुभकामनाओ सहित

हे प्रभु यह तेरापन्थ

मुम्बई टाईगर

नीरज गोस्वामी July 15, 2009 12:26 PM  

दादी होती ही ऐसी है...मजेदार...प्यारी सी...
नीरज

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ July 15, 2009 1:17 PM  

क्‍या कहें, अपनी अपनी किस्‍मत है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

विवेक सिंह July 15, 2009 1:32 PM  

हम चचेरे भाइयों सहित सात भाई हैं , बचपन में अम्मा की गोद में बैठने को लेकर बहुत झगड़ते थे !

सागर नाहर July 15, 2009 1:33 PM  

क्या जोड़ी है आदि और दादी की।
बहुत खूब भई.. ददी को ऐसे और बहुत से खेल आते हैं, जब तक यहां रहे सब सीख लो बाद में मम्मी आये तब उन्हे भी सिखा देना।
:)

ताऊ रामपुरिया July 15, 2009 1:53 PM  

वाह बेटे..ऐश करो..पर दादीजी को हमारी प्रणाम तो कह देना. इत्ता सा काम तो कर ही देगा तू?

रामराम.

‘नज़र’ July 15, 2009 2:03 PM  

वाह वाह इतना सारा प्यार मिला, बड़े ख़ुशक़िस्मत हो।

P.N. Subramanian July 15, 2009 2:11 PM  

मस्ती के दिन हैं, मस्ती तो करोगे ही. लेकिन बेवकूफ भी खूब बनाते हो. तुमने कहा की दूसरा कान भी आगे कर दिया. सरासर गलत. फोटो झूट बोलेगा
क्या? दादी से मिलवाये इसके लिए एक आइसक्रीम हमारी तरफ से.

आदि July 15, 2009 3:06 PM  

सुब्रमनीयम अंकल..
ये सरासर पापा कि गल्ति है.. एक तरफ से ही तस्विरें ले रहे थे.. अगर थोड़ा घुमते तभी तो दुसरी तरफ से अच्छी फोटो आती.. अच्छा किया आपने पकड़ लिया..

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey July 15, 2009 3:10 PM  

दादियां नानियां भगवान बनाते ही इसी काम के लिये हैं - कानिया मानिया कुर्र के लिये! :)

vineeta July 15, 2009 3:13 PM  

khoob maze kar rahe ho beta ji...mann bhi nani ke saath khel (chiriya udi.....) karta hai...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक July 15, 2009 3:33 PM  

वाह....
हम भी अपने पौत्र-पौत्री के साथ
ऐसे ही खेलते हैं।
क्या तुम
हमारे साथ भी खेलोगे आदि बेटा!

जितेन्द़ भगत July 15, 2009 3:49 PM  

वाह, दादी से घुलमि‍लकर खेल रहा है:)

Udan Tashtari July 15, 2009 4:50 PM  

वाह!! दादी के साथ खेला जा रहा है, मजे हैं भई.

दादी को हमारा भी चरण स्पर्श कह देना.

Ratan Singh Shekhawat July 15, 2009 7:15 PM  

आदि दादी के साथ तो खेलने व बड़े होने पर कहानियां सुनने में बड़ा मजा आता है आज तुमने तो अपनी दादी दिखा हमें भी अपनी की याद ताजा करा दी | दादी जी को हमारा भी प्रणाम कहना |

Nirmla Kapila July 15, 2009 9:42 PM  

अरे आदि ये खेल तो मै भी खेलती हूँ अरे पहले क्यों नही बताया तो आज कल खूब मज़े ले रहे हो दादी के साथ आशीर्वाद्

dhiru singh {धीरू सिंह} July 15, 2009 10:02 PM  

दादियाँ होती ही इस लिए अपने पोतो पोतियों से खेलने के लिए . मेरी दादी कुमाऊ से थी एक गीत गाती थी जिसमे घघुती बसुती का जिक्र होता था

अनिल कान्त : July 15, 2009 10:13 PM  

mauj le rahe ho beta

राज भाटिय़ा July 15, 2009 11:35 PM  

आदि बेटा दादी का दिल भी लग गया तेरे साथ, ओर अब दोनो खुब खेलो, दादी दादा ऎसे हि होते है बेटा.
बहुत सा प्यार तुम्हे ओर दादी को प्रणाम

Dhiraj Shah July 18, 2009 6:22 AM  

aap ke khel bhee nirale hai

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मैं आदित्य

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मै आदि हूँ.. मेरा पुरा नाम है.. "आदित्य रंजन".. २ मई २००८ को जोधपुर के "कमला नगर अस्पताल" मे दिन के ३बजकर १४ मिनिट पर मेरा जन्म हुआ.. और मेरे बारे में क्या बताऊ.. ये पूरा ब्लोग ही मेरे बारें में है.. हर रोज नई बात पता चलेगी.. ये सभी बाते आप तक मेरे मम्मी-पापा (अंजु - रंजन) पहुँचा रहे हैं..

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